VISHWA GUPTA
5 years 10 months ago
बुनियादी शिक्षा से लेकर माध्यमिक शिक्षा तक विद्यालयों में "योग शिक्षा" को "स्वतंत्र एवं अनिवार्य विषय" का दर्जा देना चाहिए, ताकि "योग शिक्षा" सभी छात्रों में चारित्रिक, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास कर सके। यह सुजननिकी और सौपरिवेशिकी का एक सर्वोत्तम माध्यम बन सके। योग शिक्षा जब तक स्कूल शिक्षा में स्वतंत्र व अनिवार्य विषय के रूप में पठन पाठन का भाग नहीं बन जाता, तब तक आयुष्मान भारत की संकल्पना भी आधी अधूरी रहेगी और साथ ही पोषण अभियान भी अधूरा रहेगा।
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