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Proposed waterways to enhance tourism & clean Ganga

Proposed waterways to enhance tourism & clean Ganga
Start Date :
Jan 01, 2015
Last Date :
Sep 30, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

How can the proposed waterways and similar initiatives complement the various efforts to clean the Ganga and at the same time enhance tourism? Should such an initiative be ...

How can the proposed waterways and similar initiatives complement the various efforts to clean the Ganga and at the same time enhance tourism? Should such an initiative be replicated for other rivers as well?

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Showing 8513 Submission(s)
Hemlata Tripathi
Hemlata Tripathi 11 years 8 months ago
sir agar ganga mein perforated basket lagayenge to logo ki religious belief ko bhi hurt nahi hoga kyonki flowers us perforated basket mein atak jayenge aur pani un flowers ko touch hokar nikal jayenga.is flowers se hum compost banakar agriculture mein use kar sakte hain. composting process ke liye sirf cow dung aur earthworms ki jarurat hain. is project ka initial cost bhi kam hain
Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal 11 years 8 months ago
मेरा लक्ष्य कोई एक जाति या लक्ष्य है हीं नही मै विश्व विरासत का हिमायती हूँ मैंने अपने ब्लोक पर भीअमरीका को हीं लिखा इराक में 176 मानव मृत्यु के अपराध में जिस सद्दाम हुसैन को मौत की सजा दी क्या वही इंसाफ है और सदा ही दोहरा मापदंड रखने को ईश्वर कभी माफ़ नही करता | जहाँ कहीं भी दो देशो में तनाव होता है उसे निपटाने के बजाय दुसरे की पीठ पर हाथ रखकर आतंकवाद को बढ़ावा देना कहूँ तो उचित हीं होगा अब मित्रता गठित हुई है शायद ईश्वर ने हकीकत का उसे एहसास करवाया हो आगे ईश्वर की मर्जी आज बस इतना हीं आपका |
Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal 11 years 8 months ago
फेंसी बाज़ार में राम मंदिर है वहां हम सभी जा रहे है यहाँ दो तीन दिन रुकेगें फिर आगे देखेगे और इस प्रकार वहीं विचारोपरांत विरक्त जीवन का परित्याग किया चार बरस वहां रहा फिर बड़े भाई की मृत्यु घर पर हो गई समय समय पर घटना कर्मों का एहसास मुझे अपने टेलीविजन से होता रहा फिर समय पश्चात मेरी विधवा भाभी के जीविकोपार्जन का सवाल आया इनसे मेरे विवाह का सवाल आया और इस प्रकार मै वैवाहिक बंधन में बंधा | कविताओ का क्रम मध्यप्रदेश से शुरू हुआ और संसार के सभी दुखो को सुनते समझते उस कृपालु के दया से विश्व मंच तक आया
Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal 11 years 8 months ago
आटा खरीद कर इन्होने अपना जीवन यापन किया मुझे अपनी माँ से बहुत प्यार था मै कभी कभी जब मेरे पास एक दो रूपये होते तो माँ को खत लिखता माँ मै ठीक हूँ फलाने तीर्थ में हूँ ताकि माँ की यादगार पीड़ा मुझे और मेरी पीड़ा माँ तक नही पहुचे | इस प्रकार एक दो बार घर भी आया सबसे मिलकर चला गया | और इसी क्रम में बड़े भाई को लकवा मार गया और छोटा भाई मुझे गोहाटी शहर में मिला जहाँ मै संतो के साथ परशुराम कुण्ड तीर्थ अरुणाचल प्रदेश की यात्रा से आरहा था | वह मुझे देखते हीं रोने लगा भैया अब जाने ना दूंगा मैंने कहा यहाँ .
Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal 11 years 8 months ago
और ईश्वरीय कृपा देखे जिन्हें मै जंगल जंगल खोजता था वह मुझे मेरे अंदर हीं मिल गया इस तरह आकाशवाणी के बदले मुझे ईश्वरीय टेलीविजन हीं मुझे मिला जो मेरा मार्ग दर्शक बना जब भी जीवन के झंझावत में मै रुका फँसा मुझे वही से सहयोग प्रेरणा मार्गदर्शन मिला | मेरे विरक्त से गृहस्त बनने की भी कहानी है |मै जब विरक्त बना तो मेरे बड़े भाई ने कुछ समय पश्चात मानसिक संतुलन खो दिया ,व्यापार में घाटा हुआ और इस तरह लोगो ने मेरे पिता की दुकान हीं बंद करवा दी | वे घर पर ही बैठे रहे मात्र 25 नये पैसे की मिर्ची और एक किलो
Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal 11 years 8 months ago
मेरा पहला सवाल है श्री मान प्रधानमन्त्री बनने से पूर्व ताईवान ,अमरीका जाकर आगये हिमालय कैलाश मानसरोवर मनमोहक झील जाकर आगये तो गरीब कब थे और बचपन में चाय चाचा श्री की दुकान से रेल के डिब्बे तक कितने माह या बरस तक बेची बरसों का त्यागी सन्यासी भरा जीवन आखिर अजीबो गरीब कहानी है | मै किसी के जीवन से प्रभावित होकर विरक्त नही बना यह मेरे बचपन की समझ का बिषय था मै ईश्वरीय आकाशवाणी सुनकर रुकने वाला इंसान बनना चाहता था मेरी अभिलाषा थी मुझे वह प्रण सत्ता परम गुरु बताए मेरा उद्धेश्य क्या है और क्यों आया ?
Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal 11 years 8 months ago
आज हीं मैंने इस सरकारी साईट को ठीक से देखा पढ़ा जहाँ अलग अलग बिषयो पर राय रखने हेतु अलग अलग फोरम बने हुए हैं पर सरकार को चाहिए इन बिषयो से इतर कोई अपनी बात रखना चाहता है तो वह कहाँ रखेगा ,या फिर शिकायत फोरम बना देने से इसकी उपयोगिता बढ़ेगी और जनमानस इस तरह जुटता चला जाएगा | मै आज कल प्रसारित मन की बात कार्यक्रम और उससे उपजे सवाल आम इंसान के रूप में अपने देश के प्रधानमन्त्री जी से पूछना चाहता उन्हें बुरा नही लगे तो एक साधक जो जिन्हें प्रभावित करता है उससे पूछता है और अगले आधे घंटे मै सवाल पूछूँगा
Sonal Digraskar
Sonal Digraskar 11 years 8 months ago
#yes i can sir, i would like to inform u that in some private engineering college, degree paise me bechi aur kharidi jati hai, in per nigrani rakhne aur ankush lgane ki jarurat hai.
manish madhukar
manish madhukar 11 years 8 months ago
If India needs to develop, we indians have to change our mind set, thinking and attitude. We have to increase boundary of our family and include bigger part of our society into that. We have to take responsibility of taking care of others and have to believe in giving than taking. If we change our attitude, if we start thinking of others, not only ganga can be cleaned but we can not only transform ourself but the whole society, country and the world.