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Revamping Teacher Education for Quality Teachers

Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

Competence of teachers and their motivation is crucial for improving the quality. Several initiatives are being taken for addressing teacher shortages, shortages of secondary ...

Competence of teachers and their motivation is crucial for improving the quality. Several initiatives are being taken for addressing teacher shortages, shortages of secondary school teachers in mathematics, science and languages, improving the quality of pre-service teachers and in-service teachers professional development, enhancing the status of teaching as a profession, improving teachers’ motivation and their accountability for ensuring learning outcomes, and improving the quality of teacher educators. The objective of this theme is to assess the existing scenario and provide workable solutions to address the gamut of issues in teacher education in the school sector.

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Showing 1126 Submission(s)
Narendra Kumar Pal
Narendra Kumar Pal 11 years 3 months ago
गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !) जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना
Narendra Kumar Pal
Narendra Kumar Pal 11 years 3 months ago
अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो| ‘दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये |
Bhuwan Pant
Bhuwan Pant 11 years 3 months ago
Most importent tasks of the teacher is not to give informetion but to give inspiration.Teachers slection should be practically.
SURINDER KAUR SAINI
SURINDER KAUR SAINI 11 years 3 months ago
Empowered,expertise and learned teacher can bring a qualitative social change.The outcome depends definetly on the efforts we put in. The efforts to bring quality must start from administrative level by bringing policies and programmes to train teacher before job and in in job according to need of time because quality brings efficiency.
Gagan_11
Gagan_11 11 years 3 months ago
अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो| ‘दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये |
Gagan_11
Gagan_11 11 years 3 months ago
गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !) जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना
Gagan_11
Gagan_11 11 years 3 months ago
अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो| ‘दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये
vipin pal
vipin pal 11 years 3 months ago
शिक्षक वो होता है जो अपने आचरण से शिक्षा दे सके। दुःख की बात हे की शिक्षा प्रणाली में ऐसे शिक्षक है जिन्होंने ये नोकरी सिर्फ अपनी आराम परस्ती और अपनी कमाई के लिए की है और हो भी क्यों न जब वें शिक्षक लाखो रूपये देकर भर्ती हुए हैं। इसलिए जरुरत है के अब हमारी शिक्षा प्रणाली में योग की नैतिकता और स्वास्थ्य को बढ़ने वाली व्यवहार परिष्कार करने वाली शिक्षा को भी शामिल किया जाये और यह भी सुनिश्चित किया जाये की पर्यावरण शिक्षा की तरह यह भी अंक पाने का साधन न बन जाये। और नतीजा ढाक के तिन पात न बन जाये।।
Rajesh Ranjan_2
Rajesh Ranjan_2 11 years 3 months ago
अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो| ‘दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये