Sanjay Kumar Saini_1
11 years 1 month ago
महिलाअाें के विरूद्ध हिंसा राेकना बहुत ही अासान है अाैर जितना कहने मे अासान है उतना करने मे भी अासान है। हम अभी से ये मान ले की महिलाये हमारी तरह इन्सान है अाैर इनमे भी जान हाेती है चाेट लगने पर इन्हे भी उतनी ही तकलीफ हाेती है जितनी हमे हाेती है। भारत मे शुरू से ही पूरूषाें की एेसी साेच रही है की महिलायें हमारे इसतेमाल के लिये ही बनायी गयी है हम इन्हे जैसे चाहे इसतेमाल कर सकते है। यही साेच बदलनी है हमे अाज अाैर अभी क्याेंकि महिलायें मन बहलाने का खिलाैना नहीं है।
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