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अनुसूचित जनजातीयों में मातृत्व और बच्चे का स्वास्थ्य

Maternal and Child Health for Tribals
आरंभ करने की तिथि :
Jun 11, 2015
अंतिम तिथि :
Jul 11, 2015
12:15 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

गर्भवती माताओं को नि:शुल्क प्रतिरक्षा के लिए सुविधा प्रदान करने के ...

गर्भवती माताओं को नि:शुल्क प्रतिरक्षा के लिए सुविधा प्रदान करने के बावजूद केवल 32.4% अनुसूचित जनजातीय माताओं (सभी सामाजिक समूहों में सबसे कम) ने ही यह सलाह प्राप्त की है कि गर्भावस्था की जटिलताएं अनुभव करने पर वे कहां जाएं।

1) इसके क्या कारण हो सकते हैं?
2) गर्भवती जनजातीय माताओं को 100% प्रतिरक्षा प्राप्त देने के लिए कौन से हस्तक्षेप आवश्यक होंगे?
3) 100% टीकाकरण को प्राप्त करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों, एजेंसियों (सरकारी तथा गैर-सरकारी) की क्या भूमिका हो सकती है।

हम इस विषय पर कुछ अनुभव और सलाह साझा करने का निवेदन करना चाहेंगे।

इस विषय पर अधिक जानकारी यहां पायी जा सकती है

फिर से कायम कर देना
115 सबमिशन दिखा रहा है
Mukesh Sahu
Mukesh Sahu 11 साल 3 दिन पहले
आज 2015 में भी भारत में रूढ़िवादिता इतनी ज्यादा है कि जन जाति / अनुसूचित जन जाति कि महिलाओ को गर्भावस्था के दौरान केसी प्रकार की जाँच या दवा उपलब्ध नहीं हो पाती है , उन्हें / उनके परिवार को जागरूक करना होगा , ठेका देना होगा एक एक गाव को दुरुस्त करने का 100 % इम्यूनाइजेशन करवाने का कोई लापरवाही हुए तो बक्शा न जाये , तब जाकर कुछ हो सकता है, ANM को पता भी नहीं रहता और डिलेवरी घर पर ही हो जाती है फिर किसका टीका कौन सी दवाई ? सरकार खर्च काफी पर्याप्त से ज्यादा कर रही है लेकिन मोनिटरिंग नहीं करती
Mukesh Sahu
Mukesh Sahu 11 साल 3 दिन पहले
बेसिक मैदानी स्तर पर इम्यूनाइजेशन कार्यकर्ता है ANM जो कि छोटे छोटे गाओ और ट्राइबल एरिया में जाकर इम्यूनाइजेशन का कार्य करती है लेकिन 78 % ANM सिर्फ कागजों पर ही काम करती है सिर्फ डॉक्यूमेंट पर ही टीकाकरण हो पता है, कोई अधिकारी गाव में कभी जाकर नहीं देखता की क्या हुआ और क्या नहीं उसको सिर्फ रिकॉर्ड से मतलब होता है इसका सिर्फ 1 बड़ा कारण है फाल्स रिपोर्टिंग / नो मोनिटरिंग सिस्टम / नो रियल ट्रैकिंग सिस्टम ओन वर्कर , मेरे पास 1 प्लान है जो की इस परेशानी से निजात दिला सकता है 1 एप्लीकेशन है .
Mukesh Sahu
Mukesh Sahu 11 साल 3 दिन पहले
मात् एवं शिशु स्वास्थ्य की ओर सरकार द्वारा कई सारी व्यवस्थाओ की पहल की जा चुकी है लेकिन ट्राइबल के लिये विशेषकर कुच भी नहीं है , जबकि सुविधाओ के प्रति ट्राइबल ज्यादा जागरूक नहीं होते उन्हें पता भी नहीं होता कि उने पास क्या क्या हक़ या अधिकार प्राप्त हैं जिनका उन्हें उपयोग करना चाहिए , वही दूसरी ओर जिन जिलो में ट्राइबल की बहुतायत है या जो जिले ट्राइबल घोषित हैं उन जगहों पर ज्यादा और अतरिक्त सुविधा मोहैया करवानी चाहिये साथ ही साथ वहा पर बजट मोनिटरिंग पर थोडा ज्यादा ध्यान भी देना होगा,
Mrityunjay Dwivedi
Mrityunjay Dwivedi 11 साल 3 दिन पहले
I think Ayurvedic physicians should be appointed in tribal areas for better health services with integrated Ayurvedic system.By doing so there will be uninterrupted flow of traditional tribal wisdom to modern world and also newly explored Ayurvedic methodologies could be taught to tribal areas. The success rate is very high because all herbs are available nearby.
SUCHITRA RAGHAVACHARI
SUCHITRA RAGHAVACHARI 11 साल 6 दिन पहले
Sir, a few tribal groups have tried to integrate with the mainstream, however many still hold traditional views on modern society & its practices. Hence, we need to first dispel the doubts regarding immunisation & modern medical methods by training atleast a few representatives from amongst them who from then on can act as "village / tribal health guides". Mobiles clinics from the nearest health outpost should visit tribal colonies weekly. MofH, MofWC, MofTribal welfare need to co-ordinate.
AKASH BALI
AKASH BALI 11 साल 1 week पहले
1.The reasons behind this is the lack of education about the immunization,they have fears about the immunization.Women feel insecure while going to some other place alone. 2.Like polio scheme,the volunteers should visit the houses of pregnant women for their vaccination.This will help them to feel secure while immunization in their homes.The "SARPANCHS" of villages should educate women about the benefits of immunization. 3.Ministry,NGOs should educate families & especially women about this.