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लघु वन उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन एवं विपणन के लिए नवीन विचार साझा करें

Give innovative ideas for value addition to the Minor Forest Produces and their Marketing
आरंभ करने की तिथि :
May 05, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

जनजातीय लोग तथा अन्य वन निवासियों की बड़ी संख्या लघु वन उत्पाद ...

जनजातीय लोग तथा अन्य वन निवासियों की बड़ी संख्या लघु वन उत्पाद (एमएफपी) जो उन्हें आवश्यक खाद्य, पोषण, चिकित्सीय आवश्यकताएं तथा नकद आय भी प्रदान करते हैं, के संग्रह एवं विपणन से अपनी आजीविका का स्रोत प्राप्त करते हैं। चूँकि लघु वन उत्पाद (एमएफपी) का व्यापार परंपरागत व्यापारो से अलग है इसलिए यह उन्हें देय लाभ नहीं देता है। जहां, सरकार ने कुछ लघु वन उत्पादों में निगमों और संघों के व्यापार का समर्थन किया है, वहीं इनकी बड़ी संख्या का बाजार में मुक्त रूप से व्यापार किया जाता है जो संग्रहकर्ताओ के लिए बहुत सहायक भी नहीं है क्योंकि लघु वन उत्पाद (एमएफपी) का उत्पादन स्थान की दृष्टि से अत्यधिक रूप से फैला हुआ है तथा इन क्षेत्रों में खराब पहुंच के कारण प्रतियोगी बाजार विद्यमान नहीं है। संग्रहकर्ताओ के लिए लघु वन उत्पादों हेतु उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वन उत्पाद (एमएफपी) के विपणन हेतु तंत्र तथा लघु वन उत्पाद (एमएफपी) के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास की नई योजना तैयार की है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय, मेरीसरकार(माईगव) के माध्यम से लघु वन उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन, एमएफपी के प्रसंस्करण एवं विपणन, परंपरागत कौशल एवं कौशल विकास इत्यादि के लिए नवीन विचारों के संबंध में समाज के सभी वर्गों से सुझाव/सूचना आमंत्रित करते हैं।

लघु वन उत्पाद संग्रहकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा का तानाबाना प्रदान करना

फिर से कायम कर देना
192 सबमिशन दिखा रहा है
uday kumar
uday kumar 11 साल 1 week पहले
Tag a Tree is my concept.. Each person in india can adopt a tree/plant at his/her preferred location. May be this can be a collaborated business plan with the Municipal cooperation. For example, if 10 persons adopted 10 plants/trees at some place in their locality or city. So that the plant/tree can be electronically tagged, at any time the user can see the status/condition of the plant/tree. Minimal charges can be accepted per plant. This can be micro-business solution for the nation.
Krishan Mohan Joshi
Krishan Mohan Joshi 11 साल 1 week पहले
महोदय लघु वन उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन एवं विपणन के लिए नवीन विचार साझा करने के क्रम में मेरा अनुरोध है कि उत्तराखंड में अंग्रेजों ने पारम्परिक बनों की जगह चीड के बन से सारे बनों को आच्छादित कर दिया जिस कारण से लघु वन उत्पादों का ब्यवसाय ही खत्म हो गया है यदि पहाडों से चीड को धीरे-२ समाप्त कर दिया जाय व पुराने पारम्परिक पेड ही लगाये जाय तो रोजगार के साधन मिल जाने से पहाड से पलायन काफी हद तक कम किया जा सकता है।
PANDYA HARDIK
PANDYA HARDIK 11 साल 1 week पहले
Central Goverment should set up facilities/stalls in cities to enable tribals to sell forest produce. They should keep entry fees say Rs. 10 per person to enter that facilities. This fees should be used to manage cost of the facility set up. Tribals who have registered themselves for this facility should be given card which they can show at the time of travelling in ST buses, so that travelling is costless to tribal coming to market forest produce in that stall.