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31 अगस्त 2025 के मन की बात कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुझाव भेजें

31 अगस्त 2025 के मन की बात कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुझाव भेजें
आरंभ करने की तिथि :
Aug 05, 2025
अंतिम तिथि :
Aug 29, 2025
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपके लिए महत्वपूर्ण विषयों और ...

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपके लिए महत्वपूर्ण विषयों और मुद्दों पर अपने विचार साझा करने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री आपको मन की बात के 125वें एपिसोड में संबोधित किए जाने वाले विषयों पर अपने विचार साझा करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

आने वाले मन की बात एपिसोड में आप जिन विषयों या मुद्दों के बारे में प्रधानमंत्री से बात करना चाहते हैं, उनसे जुड़े अपने सुझाव हमें भेजें। इस ओपन फ़ोरम में अपने विचार शेयर करें या वैकल्पिक रूप से, आप टोल-फ़्री नंबर 1800-11-7800 पर कॉल भी कर सकते हैं और प्रधानमंत्री के लिए अपना संदेश हिंदी या अंग्रेज़ी में रिकॉर्ड कर सकते हैं। रिकॉर्ड किए गए कुछ संदेश प्रसारण का हिस्सा बन सकते हैं।

आप 1922 पर एक मिस्ड कॉल भी दे सकते हैं और SMS में मिले लिंक को फ़ॉलो करके सीधे प्रधानमंत्री जी को अपने सुझाव दे सकते हैं।

और 31 अगस्त 2025 को सुबह 11:00 बजे मन की बात के साथ जुड़े रहें।

फिर से कायम कर देना
2864 सबमिशन दिखा रहा है
GAURAV H TANDON
GAURAV H TANDON 9 महीने 3 सप्ताह पहले
Moral Pollution Selling Sin: The Role of the Movie Industry in Moral Degradation Moral Pollution refers to the deterioration of ethical and moral values in society due to the widespread acceptance, promotion, or normalization of behaviors that contradict established moral principles. It occurs when cultural influences—such as media, entertainment, social trends, or public figures—encourage actions that undermine societal ethics, leading to a shift in what is perceived as right or wrong. https://www.slideshare.net/slideshow/moral-pollution-selling-sin-the-role-of-the-movie-industry-in-moral-degradation/282748184
Mahesh Kumar Gupta
Mahesh Kumar Gupta 9 महीने 3 सप्ताह पहले
विषय: “डिजिटल उपनिवेशवाद की बेड़ियाँ तोड़ने” हेतु भारत की पहल माननीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम, भारत ने पिछले दशक में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी) के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि खुला, सस्ता और सर्वसुलभ डिजिटल तंत्र न केवल नागरिकों को सशक्त कर सकता है, बल्कि विश्व के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकता है। किन्तु आज एक नई चुनौती हमारे सामने खड़ी है—डिजिटल उपनिवेशवाद। विदेशी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म हमारे डाटा, संवाद और बाज़ार पर इतना नियंत्रण रखते हैं कि किसी भी समय वे एकतरफ़ा निर्णय लेकर हमारी संप्रभुता और सुरक्षा पर असर डाल सकते हैं। हाल ही में कुछ भारतीय कंपनियों को वैश्विक क्लाउड सेवा बाधित होने का अनुभव भी हुआ है। यह दर्शाता है कि डिजिटल स्वाधीनता केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मसम्मान का प्रश्न है।
Priya sengar
Priya sengar 9 महीने 3 सप्ताह पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, मेरे घर के सामने चार फैक्ट्रियाँ स्थित हैं, जहाँ से निरंतर धुआँ निकलता है। यह धुआँ आस-पास के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है और लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इस समस्या के समाधान के लिए मेरा सुझाव है कि एक बड़ा “पैराशूटनुमा उपकरण” तैयार किया जाए, जिसे फैक्ट्रियों से निकलते धुएँ के ऊपर उड़ाया जा सके। यह उपकरण धुएँ को अपने अंदर सोख लेगा और उसे वातावरण में फैलने से रोक देगा। बाद में इस धुएँ को सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जा सकता है। इस तकनीक से वातावरण स्वच्छ रहेगा, लोगों को शुद्ध हवा मिलेगी और प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों में भी कमी आएगी। यदि इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए तो यह देशभर में प्रदूषण नियंत्रण का एक अभिनव मॉडल बन सकता है। सादर, प्रिया सेंगर
CyrilJudejoseph
CyrilJudejoseph 9 महीने 3 सप्ताह पहले
Namaskar PM Modi ji, Ganapati Bappa Morya....! Hon. PM Modi ji, your achievements are innumerable and infinite, in line with country's name and fame. Sir, I wish that, if you with your great influence, could further your "Sankalp" for "Swacch Bharat". It is a known fact, that people have short memory and the combined with short attention span, is turning lethal for such a great initiative. So, I humbly request you to take initiative for Swacch Gaav Award or something as such with cash prizes or jobs. I may be entirely incorrect. But, I want people to walk on your great guidance constantly. I pray, that you consider my humble request. Thank you. Yours truly, Mr. Jude C. J.
suruchiwadhwa
suruchiwadhwa 9 महीने 3 सप्ताह पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, आपके प्रेरक आह्वान से हमें यह विश्वास मिला है कि गृहिणियाँ और साधक भी राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय सहयोग दे सकते हैं। हम साधक लंबे समय से शिक्षा में मूल्यों को जोड़ने के कार्य में लगे हैं। हमारा उद्देश्य है कि शिक्षा-प्रणाली में ऐसा बदलाव आए, जिससे बच्चों को केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि हमारे देश की संस्कृति, परंपरा और जीवन-दर्शन भी सरल कहानियों, कविताओं और अभ्यासों के माध्यम से मिल सके। हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी अनुशासन, करुणा और जिम्मेदारी जैसे संस्कारों से परिचित हो और यही राष्ट्र की सशक्त नींव बने। इस दिशा में हम आपके नेतृत्व में सहयोग देने को तत्पर हैं। सादर, सुरुचि (आध्यात्मिक साधक)