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आरंभ करने की तिथि :
Aug 21, 2020
अंतिम तिथि :
Nov 14, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
Healthcare practices advocated by Ayush systems (namely Ayurveda, Yoga, Naturopathy, Unani, Siddha, Sowa-Rigpa and Homoeopathy) are known to promote general wellness. In fact, they ...
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
सारिवादि वटी (divya sarivadi vati) एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कान के रोग, प्रमेह, रक्तपित्त रोग, क्षयरोग, श्वास फूलना, नपुंसकता, पुराना बुखार, मिर्गी, बवासीर, हृदय रोग और स्त्री रोग को नष्ट करने वाली होती है। इस वटी का प्रयोग मुख्यरूप से कान के रोगों में किया जाता है। कान के रोगों के लिए यह पतंजली द्वारा दी जाने वाली यह एक प्रमुख औषधि (Patanjali Medicine for Ears) है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
पाचनतंत्र संंबंधी परेशानी जैसा- भोजन का सही तरह से नहीं पचना, भूख कम लगना आदि में भी संशमनी वटी का उपयोग किया जा सकता है। यह पाचनतंत्र विकार को दूर करने में फायदेमंद होती है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
कई महिलाएं ल्यूकोरिया से ग्रस्त रहती हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे ना सिर्फ महिलाएं परेशानी रहती हैं बल्कि इसका महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। ल्यूकोरिया को ठीक करने के लिए भी संशमनी वटी (Shanshamani Vati) का उपयोग लाभदायक होता है। महिलाएं संशमनी वटी के उपयोग की जानकारी किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से लें।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
कई लोग पीलिया को बहुत साधारण रोग समझते हैं लेकिन सच यह है कि पीलिया एक जानलेवा बीमारी है। जब भी कोई व्यक्ति पीलिया से ग्रस्त होता है तो उसे ना सिर्फ सही इलाज की जरूरत होती है बल्कि कई तरह के परहेज भी करने होते हैं। पीलिया रोग को पाण्डु रोग (जौंडिस) भी बोलते हैं। आप पीलिया में संशमनी वटी से भरपूर लाभ ले सकते हैं।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
औदुम्बर कुष्ठ में शरीर की त्वचा खराब, और रूखी हो जाती है। इसमें त्वचा की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है, और शरीर सुन्नपन पड़ जाता है। पसीना अधिक निकलता है। ऐसे में आरोग्यवर्धिनी वटी को गन्धक रसायन के साथ प्रयोग करना चाहिए। यह कुष्ठ रोग की यह चमत्कारिक दवा है जिसे कुष्ठ रोग के साथ-साथ त्वचा रोगों में यह लाभ मिलता है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
औदुम्बर कुष्ठ में शरीर की त्वचा खराब, और रूखी हो जाती है। इसमें त्वचा की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है, और शरीर सुन्नपन पड़ जाता है। पसीना अधिक निकलता है। ऐसे में आरोग्यवर्धिनी वटी को गन्धक रसायन के साथ प्रयोग करना चाहिए। यह कुष्ठ रोग की यह चमत्कारिक दवा है जिसे कुष्ठ रोग के साथ-साथ त्वचा रोगों में यह लाभ मिलता है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
आरोग्य का मतलब होता है जहां रोग या बीमारी ना हो, और वर्धिनी का मतलब है रोग को दूर करे वाला। आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati) का मतलब है, वैसी वटी जो शरीर के रोगों को ठीक करे। आरोग्यवर्धिनी वटी एक औषधि है जिसका सेवन कर कई रोगों में लाभ पाया जा सकता है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
योग करते हुए सिर्फ और सिर्फ आयुर्वेदिक चिकित्सा का ही लाभ लेना चाहिए, क्योंकि योग आपके शरीर की प्रकृति को सुधारता है। योग और आयुर्वेद का संबंध अटूट है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
आयुर्वेद एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। बहुत से ऐसे रोग और मानसिक विकार हो सकते हैं जिस पर योग कंट्रोल न भी कर पाए तो आयुर्वेद उसका विकल्प बन जाता है और बहुत से ऐसे रोग भी होते हैं जिसे आयुर्वेद न भी कंट्रोल कर पाए तो योग उसका विकल्प बन जाता है।
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Yatyendra singh
5 साल 7 महीने पहले
निश्चित ही योग करते हुए आप स्वस्थ रह सकते हैं लेकिन प्रकृति की शक्ति आपकी शक्ति से भी ज्यादा है और मौसम की मार सभी पर रह सकती है। हिमालय में प्राणायाम के अभ्यास से शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखा जा सकता है, लेकिन मान लो कोई गंभीर रोग हो ही गया तो फिर क्या कर सकते हैं। ऐसे में उन्होंने कई चमत्कारिक जड़ी-बुटियों की खोज की जो व्यक्ति को तुरंत तंदुरुस्त बनाकर दीर्घजीवन प्रदान करे।
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