Asatishivani
1 year 1 month ago
महिला एवं बाल विकास अंतर्गत बाल विकास परियोजनाएॅ संचालित है जिनमें लगभग 100 से 300 आंगनवाडी केन्द्रो का कार्य किया जाता है। लेकिन इन परियोजनाओं में मात्र दो या तीन ही कर्मचारी पदस्थ है जिनमे से आउटसोर्स भी पदस्थ है जिनकी कोई जिम्मेदारी नही है। न ही नियुक्ति का कोई आधार है । कई पद कुछ वर्षों से रिक्त है। किसी की 15 मिनट में उपस्थिति दर्ज हो जाती है तो कोई पूरे समय बैठकर काम करता रहता है और जिम्मेदार होता है। पर्यवेक्षको को भी कार्यालय में कोई शाखा की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। और पूरे समय रहना चाहिए। जब विभाग में आंगनवाडी कार्यकर्ता के पद पर , सहायिका के पद पर , पर्यवेक्षक के पद पर महिलाओं को ही पदस्थ किया जाता है तो कार्यालयों में भी सिर्फ महिलाओ ंको ही पदस्थ किया जाना चाहिए। प्रमोशन 7 वर्ष में दिया जाना चाहिए। नियुक्ति तक आरक्षण को सीमित किया जाना चाहिए। किन्तु प्रमोशन में व्यवधान होने पर अधिक योग्यता पर पेपर के माध्यम से चयन किया जाना चाहिए। बच्चों की उपस्थिति का आधार होना चाहिए जिससे वास्तविक रूप से लाभ बच्चों को पहुंच सके।
Like
(1)
Dislike
(0)
Reply
Report Spam