Home | MyGov

Accessibility
Accessibility Tools
Color Adjustment
Text Size
Navigation Adjustment
Screen Reader iconScreen Reader

Revamping Teacher Education for Quality Teachers

Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

Competence of teachers and their motivation is crucial for improving the quality. Several initiatives are being taken for addressing teacher shortages, shortages of secondary ...

Competence of teachers and their motivation is crucial for improving the quality. Several initiatives are being taken for addressing teacher shortages, shortages of secondary school teachers in mathematics, science and languages, improving the quality of pre-service teachers and in-service teachers professional development, enhancing the status of teaching as a profession, improving teachers’ motivation and their accountability for ensuring learning outcomes, and improving the quality of teacher educators. The objective of this theme is to assess the existing scenario and provide workable solutions to address the gamut of issues in teacher education in the school sector.

Reset
Showing 1126 Submission(s)
bhupesh sahu
bhupesh sahu 11 years 3 months ago
प्राथमिक शिक्षा कोई आसान काम नहीं है इसके लिए जो शिक्षक है उनको पर्याप्त सुविधा मिलनी चाहिए।
Prakash KC
Prakash KC 11 years 3 months ago
समाज में सबसे अधिक महत्त्व एवं साधन सुविधायें, यदि किसी को दिया जाता है तो उसमें सबसे प्रमुख एवं सबसे अधिक हमारे गुरुजन बन्धुओं को ही मिलनी चाहिये ताकि उनका मस्तिष्क सदा ही निश्चिन्तता पूर्वक अध्यापन में ही लगा रहे। प्रत्येक समाज में अध्यापक बन्धुओं को आदर एवं सम्मान दिया जाना चाहिये ।
Prakash KC
Prakash KC 11 years 3 months ago
अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो| ‘दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये
Prakash KC
Prakash KC 11 years 3 months ago
गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !) जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी हो
padullaparthy suryanarayana murthy
padullaparthy suryanarayana murthy 11 years 3 months ago
1. Proper supervision of training colleges. 2.Firm administration on the functioning of the colleges.
Savita Arya
Savita Arya 11 years 3 months ago
निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना अनिवार्य होना चाहिए ।
Savita Arya
Savita Arya 11 years 3 months ago
गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !) जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना
Savita Arya
Savita Arya 11 years 3 months ago
अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो| ‘दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये |
Savita Arya
Savita Arya 11 years 3 months ago
गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !) जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना
kanha_1
kanha_1 11 years 3 months ago
Teachers should not be directly taken by just seeing the degree.. But a 10 days demo to be conducted and student's opinion is to be asked