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वार्ता
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88 सबमिशन दिखा रहा है
Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
अध्यात्म सामान्य मानव से महामानव या महापुरुष या दिव्य पुरुष बनाने वाला एक योग या साधना से सम्बन्धित विस्तृत क्रियात्मक एवं अनुभूतिपरक आध्यात्मिक जानकारी है
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
स्वाध्याय: अफसोस पर अफसोस ! कि मनुष्य मानवता स्थापित करने वाले इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को भी बन्द कर करवा दिये हैं तथा यह निकम्मी एवं भ्रष्ट सरकारें भी (विश्व की ही) इस स्वाध्याय रूप अदभुत कारखाने को प्रायः हर पाठशाला एवं विद्यालयों तक में भी खोल-खुलवा कर सबके लिये अनिवार्य नहीं कर करवा रही है।
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
वास्तव में जब तक पिण्ड और ब्रह्माण्ड के तुलनात्मक अध्ययन के साथ उसमें आपस में तालमेल बनाये रखने हेतु पृथक्-पृथक् पिण्ड और ब्रह्माण्ड की यथार्थतः प्रायौगिक और व्यावहारिक जानकारी तथा ब्रह्माण्डीय विधान मात्र ही पिण्ड का भी विधि-विधान यानी स्थायी एवं निश्चयात्मक विधि-विधान ही नहीं होगा तथा एक मात्र ब्रह्माण्डीय विधि-विधान को अध्ययन पद्धति या शिक्षा प्रणाली के रूप में लागू नहीं किया जायेगा, तब तक अभाव एवं अव्यवस्था दूर नहीं किया जा सकता है, कदापि दूर हो ही नहीं सकता ।
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
शिक्षा (Education) संसार से शरीर मात्र जड पदार्थों की जानकारी
स्वाध्याय (Self Realization) शरीर से जीव (रूह – सेल्फ) की जानकारी व दर्शन
अध्यात्म (Spiritualization) जीव से आत्मा (नूर – सोल) की जानकारी व दर्शन
तत्त्वज्ञान; (True, Supreme & Perfect KNOWLEDGE) अथवा विद्यातत्त्वम् पद्धति आत्मा से खुदा-गॉड-भगवान की जानकारी सहित दर्शन
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
विद्यातत्त्वम् पद्धति के बिना हमारी समस्याये जैसी कल थी आज है और यदि इसे समय रहते लागु नही किया गया तो आंगे भी रहेंगी |
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
देश के सभी नागरिको को सत्य इमान संयम और सेवा का पाठ पढा दीजिये जो की अध्ययन-अध्यापन से ही सम्भव है|
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
सत्य इमान संयम और सेवा का पाठ पढा दीजिये |
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
सारा समाज समाज आज झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट, हिंसा आतंकवाद, हमारे सारे अधिकारी कर्मचारी (कुछ को छोड़कर) चोर बेइमान हो गए | इसका जिम्मेदार कौन दी जाने वाली शिक्षा, जैसा बीज वैसी फसल |
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Rajesh Kumar
10 साल 11 महीने पहले
A person was involved in recruitment scam at one NIT.He was protected & given directorship of an NIT. Here also he was involved in irregularities in promotions and was indicted by CBI for major penalty was recommended by CBI. He was also found guilty of negligence and tempering with proofs in death of 2 students. In this case also he is on bail in a case under 304. At present he is director of another NIT. He had spoiled present institute too.Under such director how good faculty will feel?
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
समाज में सबसे अधिक महत्त्व एवं साधन सुविधायें, यदि किसी को दिया जाता है तो उसमें सबसे प्रमुख एवं सबसे अधिक हमारे गुरुजन बन्धुओं को ही मिलनी चाहिये ताकि उनका मस्तिष्क सदा ही निश्चिन्तता पूर्वक अध्यापन में ही लगा रहे ।
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