पूर्वोत्तर क्षेत्र में यदि तेल और गैस का दोहन उचित रूप से किया जाये तो यह उस क्षेत्र के लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि का एक स्रोत हो सकता है। वर्तमान में क्षेत्र के स्थानीय समुदायों और अन्वेषण तथा उत्पादन प्रचालकों के बीच कोई संपर्क नहीं है। इससे क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन संबंधी कार्यों में कमी आ रही है और इसने इस क्षेत्र में परिचालन के लिए खरीदार की संख्या को कम कर दिया है। हालांकि भारत सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक पहलें शुरू की है लेकिन इस प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इस कार्य में स्थानीय लोगों की भागीदारी कैसे बढाई जा सकती है, इससे संबंधित सुझाव दें।